SIFARNAMA · POETRY
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ख़ामोशी
ख़ामोशी गूँजती है, जो सुन सको तो सुनो,
हर बात कहने के लिए लफ़्ज़ नहीं होते।
ख़ामोशी गूँजती है, जो सुन सको तो सुनो,
हर बात कहने के लिए लफ़्ज़ नहीं होते।