SIFARNAMA · POETRY
میرے الفاظ

मेरे अल्फ़ाज़...

चंद खयालात जो यूँ ही ज़ेहन में उतर आए...

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शाही निवाला

सच लिखती कलम रुक ही जाती है

सवाल करती ज़बान चुप सी जाती है

पहुंचते ही पेट में शाही निवाला

सीधी दिखती कमर झुक ही जाती है
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read

ख़ामोशी

ख़ामोशी में छुपा है, जो जवाब सुकून का,
हर शोर में वो बात नहीं होती।
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read

امّید

ہر مشکل سے نکلنے کا ایک سہارا ہوتا ہے
امّید کا دامن پکڑ، طوفان سے بھی کنارہ ہوتا ہے۔
— شہاب خان صفر
02 Sep 2026 Read

ख़ामोशी

ख़ामोशी गूँजती है, जो सुन सको तो सुनो,
हर बात कहने के लिए लफ़्ज़ नहीं होते।
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read

वक़्त-वक़्त की बात है

कभी तन्हा, कभी महफ़िल वक़्त-वक़्त की बात है...
कभी राहत, कभी मुश्किल वक़्त-वक़्त की बात है...
कभी दरिया, कभी साहिल वक़्त-वक़्त की बात है...
आज अधूरा, कल मुकम्मल वक़्त-वक़्त की बात है...
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read

सुकून?

मैदान-ए-जंग में भटक रहे हैं सुकून की तलाश में
अमन का पैग़ाम लेकर निकले हैं जंग के लिबास में ...
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read

मंज़िल

मंज़िलें मिलकर रहेंगी घर से निकल तो सही
रास्ते मुंतज़िर हैं घर से निकल तो सही
न डर तन्हा चलने से, मिलेंगे हमसफ़र भी
बनेगा काफ़िला भी, घर से निकल तो सही
मुश्किलें भी होंगी, राहतें भी हांगी
बांध के सर से कफ़न, घर से निकल तो सही
मंज़िलें मिलकर रहेंगी घर से निकल तो सही ....
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read

इब्तिदा-ए-सफ़र

इब्तिदा-ए-सफ़र में लड़खड़ाता क्यों है ?
अभी तो सफ़र तवील है घबराता क्यों है ?
हौसला रख आगे बढ़ डगमगाता क्यों है ?
रास्ते की मुश्किलों से डर जाता क्यों है ?
मंज़िल तेरी मुंतज़िर हिम्मत हार जाता क्यों है ?
— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026 Read