Stories
Stories, reflections and imagined worlds by Shahab Khan.

पिंजरे के पंछी
पक्षियों को एक छोटे और सुन्दर पिंजरे में घर बरामदे में टांग दिया गया। स्कूल की छुट्टियां है तो राजू का ज़्यादातर वक़्त पक्षियों के आस पास ही गुज़रता है। पक्षियों को खाना देना, उनके पास बैठकर बातें करना उसका सब से पसंदीदा काम बन गया है।
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नफ़रत की आग
आग ने एक शैतानी ठहाका लगाया और तेज़ी से उस बस्ती की तरफ बढ़ चली। वो लोग भी जोश में नारे लगाते, जय-जयकार करते, खुशी मनाते उसके पीछे-पीछे भागे। जैसे ही आग बस्ती में पहुँची, उसने तबाही मचानी शुरू कर दी। चारों तरफ सिर्फ चीखें-पुकार सुनाई देने लगी। बच्चे हों या बूढ़े, आग सबको जलाने लगी। वो लोग और भी जोश में आ गए, ज़ोर-ज़ोर से नारे लगाने लगे।
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गुब्बारे वाला
गार्डन के बाहर सड़क के दूसरी तरफ़ गुब्बारे बेचने वाला खड़ा है। मोहित की 6 साल की बेटी स्नेहा की नज़र गुब्बारे वाले पर पड़ी। गुब्बारे देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने कहा-
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पिंजरे के पंछी
पक्षियों को एक छोटे और सुन्दर पिंजरे में घर बरामदे में टांग दिया गया। स्कूल की छुट्टियां है तो राजू का ज़्यादातर वक़्त पक्षियों के आस पास ही गुज़रता है। पक्षियों को खाना देना, उनके पास बैठकर बातें करना उसका सब से पसंदीदा काम बन गया है।
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