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विचार, शब्द और ज़िंदगी के कुछ अनकहे पहलू
Thoughts, ideas and perspectives beyond the page
خیالات، الفاظ اور زندگی کے کچھ اَن کہے پہلو
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गज़ा के बच्चे, Gaza
Hindi · Humanity · Reflection · 9 min read

ग़ज़ा की टूटी दीवारों के पीछे बच्चों की बेबस मुस्कानें – शहाब ख़ान

ग़ज़ा की जो तस्वीरें हमें दिखती हैं, वो सिर्फ़ मलबा हैं। मगर उस मलबे के पीछे एक पूरी दुनिया है। वहाँ बच्चे कंक्रीट के टुकड़ों के बीच अपनी गुड़िया ढूँढते हैं। वहाँ बच्चियाँ अपनी कॉपियाँ समेटती हैं, ताकि कल स्कूल जा सकें, अगर स्कूल बचा हो। वहाँ बच्चे तंबू के अंदर बैठकर अपने दोस्तों के नाम याद करते हैं, जो अब नहीं हैं।

ग़ज़ा डायरी
Hindi · Humanity · Life · Reflection · 12 min read

मैंने ‘ग़ज़ा डायरी’ क्यों लिखी: एक क़लम की कहानी, मेरे ज़मीर की आवाज़

कुछ किताबें लिखी नहीं जातीं, वो ख़ुद को लिखवा लेती हैं। "ग़ज़ा डायरी" मेरे लिए वही किताब है। ये कहानी किसी मेज़ पर बैठकर तराशी हुई चीज़ नहीं, ये उस दर्द से निकली है जो महीनों तक सीने में चुभता रहा, जो रातों को सुलाता नहीं था। जब मैं फ़िलिसतीन के लोगों, मासूम बच्चों पर जुल्म की इंतिहां देखता तो दिल तड़प उठता था। जब मैंने मासूम हिंद रजब के क़त्ल की तफ़सील पढ़ी, तो लगा जैसे किसी ने अंदर ही अंदर कुछ तोड़ दिया हो। उसके बाद जो लिखा गया, वो सिर्फ़ कहानी नहीं, एक ज़िम्मेदारी बन गई।