SIFARNAMA · POETRY
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शाही निवाला
सच लिखती कलम रुक ही जाती है
सवाल करती ज़बान चुप सी जाती है
पहुंचते ही पेट में शाही निवाला
सीधी दिखती कमर झुक ही जाती है
सच लिखती कलम रुक ही जाती है
सवाल करती ज़बान चुप सी जाती है
पहुंचते ही पेट में शाही निवाला
सीधी दिखती कमर झुक ही जाती है