SIFARNAMA · POETRY ← Back

शाही निवाला

सच लिखती कलम रुक ही जाती है

सवाल करती ज़बान चुप सी जाती है

पहुंचते ही पेट में शाही निवाला

सीधी दिखती कमर झुक ही जाती है

— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026