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मंज़िल

मंज़िलें मिलकर रहेंगी घर से निकल तो सही
रास्ते मुंतज़िर हैं घर से निकल तो सही
न डर तन्हा चलने से, मिलेंगे हमसफ़र भी
बनेगा काफ़िला भी, घर से निकल तो सही
मुश्किलें भी होंगी, राहतें भी हांगी
बांध के सर से कफ़न, घर से निकल तो सही
मंज़िलें मिलकर रहेंगी घर से निकल तो सही ....

— Shahab Khan 'Sifar'
02 Sep 2026