
उर्दू रस्म-उल-ख़त का सफ़र: सेमिटिक से नस्तालीक़ तक – सिफ़र
उर्दू लिखावट की बुनियाद सेमिटिक (Semitic) ख़त में है। सेमिटिक ज़बानों की ख़ास बात ये है कि इनमें सिर्फ़ हर्फ़-ए-सहीह (consonants) लिखे जाते हैं, हर्फ़-ए-इल्लत (vowels) छोड़ दिए जाते हैं। अरबी ख़त की जड़ें आरामी (Aramaic) और नब्ती (Nabataean) ख़तों में मिलती हैं। नब्ती को अरबी ख़त का वालिद माना जाता है, जो असल में आरामी की एक शाख़ थी।
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नुक़्ता लगाने का शौक़: जब उर्दू के सादे लफ़्ज़ ‘ख़ूबसूरत’ बनाने की कोशिश में मायने ही बिगड़ जाए
कई लोग ये समझते हैं कि उर्दू लिखने का असल फ़न तो नुक़्ते लगाने में है। खासतौर पर ग़ैर मुस्लिम जिन्हें उर्दू पसंद है लेकिन बुनियादी उसूल मालूम न होने की वजह से अक्सर उर्दू लफ़्ज़ को देवनागरी और रोमन में लिखने और बोलने में ग़लती हो जाती है।

उर्दू रस्म-उल-ख़त का सफ़र: सेमिटिक से नस्तालीक़ तक – सिफ़र
उर्दू लिखावट की बुनियाद सेमिटिक (Semitic) ख़त में है। सेमिटिक ज़बानों की ख़ास बात ये है कि इनमें सिर्फ़ हर्फ़-ए-सहीह (consonants) लिखे जाते हैं, हर्फ़-ए-इल्लत (vowels) छोड़ दिए जाते हैं। अरबी ख़त की जड़ें आरामी (Aramaic) और नब्ती (Nabataean) ख़तों में मिलती हैं। नब्ती को अरबी ख़त का वालिद माना जाता है, जो असल में आरामी की एक शाख़ थी।
