
उर्दू रस्म-उल-ख़त का सफ़र: सेमिटिक से नस्तालीक़ तक – सिफ़र
उर्दू लिखावट की बुनियाद सेमिटिक (Semitic) ख़त में है। सेमिटिक ज़बानों की ख़ास बात ये है कि इनमें सिर्फ़ हर्फ़-ए-सहीह (consonants) लिखे जाते हैं, हर्फ़-ए-इल्लत (vowels) छोड़ दिए जाते हैं। अरबी ख़त की जड़ें आरामी (Aramaic) और नब्ती (Nabataean) ख़तों में मिलती हैं। नब्ती को अरबी ख़त का वालिद माना जाता है, जो असल में आरामी की एक शाख़ थी।
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रुपया, डॉलर, अर्थव्यवस्था और राजनीति (व्यंग्य)
मेरी बात सुनकर रुपये के चेहरे की उदासी बढ़ गई। पहले उसने आसमान की तरफ देखा और फिर मुझसे नज़रें मिलते हुए कहने लगा मैं बढ़ती महंगाई के बोझ से दबा जा रहा हूँ, मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने के कारण मेरी हालत पहले जैसी नहीं रही, डॉलर के मुक़ाबले में कमज़ोर होता जा रहा हूँ, डॉलर के मुक़ाबले में मेरी इतनी ख़राब स्थिति कभी नहीं हुई। नोटबंदी के बाद तो मेरी कमर ही टूट गई है। ये कहते कहते रुपये का चेहरा रुंआसा सा हो गया।

निंदा आयोग – व्यंग्य
राजनीति में निंदा की परम्परा सदियों से चली आ रही है। राजनेताओं द्वारा एक दूसरे की निंदा करना (कीचड उछालना) जन्मसिद्ध अधिकार जैसा है। कभी एक राजनेता दूसरे पर किसी घटना की निंदा न करने पर उस राजनेता की निंदा करते है तो कभी किसी बात पर अनावश्यक निंदा करने पर निंदा करते हैं। राजनीती को निंदा ने हर तरफ से ऐसे घेर रखा है जैसे हमें हर तरफ से हवा ने घेरा हुआ है।
