रुपया, डॉलर, राजनीति, व्यंग्य
Hindi · Economics · Politics · Satire · Society · 15 min read

रुपया, डॉलर, अर्थव्यवस्था और राजनीति (व्यंग्य)

मेरी बात सुनकर रुपये के चेहरे की उदासी बढ़ गई। पहले उसने आसमान की तरफ देखा और फिर मुझसे नज़रें मिलते हुए कहने लगा मैं बढ़ती महंगाई के बोझ से दबा जा रहा हूँ, मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने के कारण मेरी हालत पहले जैसी नहीं रही, डॉलर के मुक़ाबले में कमज़ोर होता जा रहा हूँ, डॉलर के मुक़ाबले में मेरी इतनी ख़राब स्थिति कभी नहीं हुई। नोटबंदी के बाद तो मेरी कमर ही टूट गई है। ये कहते कहते रुपये का चेहरा रुंआसा सा हो गया।

निंदा आयोग
Hindi · Politics · Satire · Society · 10 min read

निंदा आयोग – व्यंग्य

राजनीति में निंदा की परम्परा सदियों से चली आ रही है। राजनेताओं द्वारा एक दूसरे की निंदा करना (कीचड उछालना) जन्मसिद्ध अधिकार जैसा है। कभी एक राजनेता दूसरे पर किसी घटना की निंदा न करने पर उस राजनेता की निंदा करते है तो कभी किसी बात पर अनावश्यक निंदा करने पर निंदा करते हैं। राजनीती को निंदा ने हर तरफ से ऐसे घेर रखा है जैसे हमें हर तरफ से हवा ने घेरा हुआ है।

gadhon ki sabha
Hindi · Satire · Society · 9 min read

गधों की सभा (व्यंग्य)

एक घने जंगल के बीचोबीच एक छोटा-सा मैदान था। वहां एक अजीब-सी हलचल मची थी। गधों का एक बड़ा झुंड जमा था, और माहौल कुछ उत्सव जैसा था। खबर आई थी कि गधों की एक “महासभा” बुलाई गई है, और इस सभा में कुछ बेहद अहम फैसले लिए जाएंगे। सभा का आयोजन ‘गदाधर’ नामक अनुभवी गधे ने किया था, जिसे जंगल के सभी गधों का लीडर माना जाता था।