Aawazain Urdu Poetry By Shahab Khan 'Sifar'
SHAHAB KHAN · POETRY

बुलंद रहेंगी आवाज़ें

Hindi · Courage, Hope, Motivation, Social

Aawazain Urdu Poetry By Shahab Khan 'Sifar'

बुलंद रहेंगी आवाज़ें, हर खामोशी तोड़ेंगी दीवारें,
हर चीख़ में गूंजेंगी अब, बेबाक सी कुछ पुकारें।
जो सर झुकाकर चलते हैं, वो क्या लड़ेंगे तूफ़ाँ से,
चंद जाँबाज बहायेंगे सड़कों पे अब इन्क़लाब की धारें।
हर बात दबाने वालों से, ये रोज़ टकराएंगी,
हाकिम की नींदें उड़ जाएँ, कुछ ऐसे रंग दिखाएँ दीवारें।
जब सच पे ताले जड़ दिए जाएं और क़ैद हर्फ़ भी हो जाएं,
तब शहर को जगाने को, खुद आग़ाज़ बन जाएं दीवारें।
बन्द कमरों में जो बैठे हैं, हक़ उनसे क्या माँगेंगे,
हम बोलेंगे, हम लिखेंगे  और लहू से सजाएँगे दीवारें।
जब ख़ौफ़ ज़ुल्म का टूटेगा, और मज़लूम अपना हक़ मांगेगा
हर मोड़ पे सच बोलेगा, हर राह पे बोलेंगी दीवारें।
बुलंद रहेंगी आवाज़ें, हर खामोशी तोड़ेंगी दीवारें,
हर चीख़ में गूंजेंगी अब, बेबाक सी कुछ पुकारें।

– शहाब ख़ान  ‘सिफ़र’