SHAHAB KHAN · POETRY
मैं फ़िलिस्तीन हूँ
Main Filisteen Hoon Urdu Poetry By Shahab Khan 'Sifar'
मैं फ़िलिस्तीन हूँ, हर दिन ज़ुल्म से टकराता हूँ,
गोलियों की बारिश में भी सीना तान के जाता हूँ।
ख़ून से लथपथ हैं गलियाँ, फिर भी फ़ख्र से मुस्काता हूँ,
टैंकों की गूंज में भी अल्लाह का नाम सुनाता हूँ।
मेरे बच्चों की हँसी अब राख में छुप जाती है,
मैं फिर भी उम्मीदों का चराग़ जलाता हूँ।
हर बम मेरी मिट्टी को और मज़बूत करता है,
मैं टूट के भी दुश्मन को ललकार सुनाता हूँ।
मेरी खाने पर भी पहरे हैं, मेरे घर भी वीरान हैं,
मैं टूटी मस्जिदों में भी आँसू से सजदा कर आता हूँ।
मैं फ़िलिस्तीन हूँ, हर दिन ज़ुल्म से टकराता हूँ,
मौत की सरहद पार भी ज़िंदा नज़्म कहलाता हूँ।– शहाब ख़ान ‘सिफ़र’
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