ग़ज़ा डायरी
Hindi · Humanity · Life · Reflection · 12 min read

मैंने ‘ग़ज़ा डायरी’ क्यों लिखी: एक क़लम की कहानी, मेरे ज़मीर की आवाज़

कुछ किताबें लिखी नहीं जातीं, वो ख़ुद को लिखवा लेती हैं। "ग़ज़ा डायरी" मेरे लिए वही किताब है। ये कहानी किसी मेज़ पर बैठकर तराशी हुई चीज़ नहीं, ये उस दर्द से निकली है जो महीनों तक सीने में चुभता रहा, जो रातों को सुलाता नहीं था। जब मैं फ़िलिसतीन के लोगों, मासूम बच्चों पर जुल्म की इंतिहां देखता तो दिल तड़प उठता था। जब मैंने मासूम हिंद रजब के क़त्ल की तफ़सील पढ़ी, तो लगा जैसे किसी ने अंदर ही अंदर कुछ तोड़ दिया हो। उसके बाद जो लिखा गया, वो सिर्फ़ कहानी नहीं, एक ज़िम्मेदारी बन गई।

दवा-दारू
Hindi · Culture · Life · Society · 6 min read

‘दवा-दारू’ एक आम फ़हम लफ़्ज़ की सही पहचान

असल में "दारू" का रिश्ता फ़ारसी ज़ुबान से है, और इसका मतलब दवा होता है। जब हम "दवा-दारू" कहते हैं, तो इसका मतलब होता है बीमारी का इलाज या किसी मर्ज़ को ठीक करने के लिए अपनाए गए तरीक़े। यानी, इसमें न तो शराब का कोई तसव्वुर है और न ही इसका शराब से कोई ताल्लुक़। ये पूरी तरह से सेहत और इलाज से जुड़ा एक मुहावरा है।